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बड़े कमाल का है ये सिस्टम

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वाह रे सिस्टम :
” देश का आम आदमी दो वक़्त की रोटी के लिए फटे जूते पहेनकर दौड़ रहा है सुबह से शाम तक और देश को लुटनेवाले उसीका मज़ाक उड़ाते है मानो आमआदमी ही इस सिस्टम का सबसे बड़ा गुनहगार हो ,कमाल का है ना इस देश का सिस्टम इस देश मे टेक्स भरनेवाले मर जाते है और देश को लुटनेवाले आबाद हो जाते है वाह रे ! सिस्टम |”

* सिस्टम का मारा आमआदमी
” रोटी की चोरी करने पर आपको सजा हो सकती है मगर देश की तिजोरी साफ करनेवालों को जमानत भी तुरंत मिल जाती है ये है हमारा सिस्टम ,गरीब लोगो पर डंडे बरसते है और डंडे बरसानेवाले वही हाथ देश को लुटनेवालों को सलाम करते है कमाल का है सिस्टम पड़ोस के घर मे आप चोरी करते हो तो जज …ये सिस्टम आपको कड़ी से कड़ी सजा सुनता है मगर देश को लुटनेवालों को भी वही जज तुरंत जमानत दे देता है वहाँ सजा नहीं जमानत है सजा तो सिर्फ आम आदमी के लिए ही है ………..ये है हमारा सिस्टम  |”

*बेकसुरों को डंडा तो चोरो को सलाम :
” देश को लुटनेवाले स्विस बैंक मे पैसा जमा करवाते है मगर आम आदमी जो टेक्स भर रहा है वो अपने बचत खाते मे पैसे भी जमा नहीं करवा सकता है फिर भी उस आम आदमी को 28 वाला अमीर कहा जाता है कमाल का है ये सिस्टम …..है ना ? आम आदमी का पगार कभी बढ़ता नहीं है महेंगाइ मे मगर इस देश को लुटनेवालों का पगार बढ़ता है कहेकर की महेंगाइ है, क्यू की आम आदमी 28 वाला अमीर है ……कमाल का है सिस्टम ,किसीको शक के आधार पर पकड़ता है ये सिस्टम तो सालो नीकल जाते है छूटने मे मगर देश के लुटेरो को जमानत भी मिल जाती है चुटकियों मे ये भी सिस्टम है ,आम आदमी की कोई जेबकतरा जेब काटता है तो उस जेब कतरे की जगह जगह तस्वीर लगता है ये सिस्टम मगर देशवासियों की जेब काटने पर सलाम करता है ये सिस्टम |”

* मेरी जेब जो खाली है वरना कमाल का है सिस्टम :

” जेब कतरो को सरेआम पीटता है ये सिस्टम मगर देशवासियों की जेब काटनेवालों की सुरक्षा करता है ये सिस्टम …देशवासियो को डंडे दिखानेवाला सिस्टम देश लुटनेवालों के जूते भी साफ करता है, बड़ा कमाल का है सिस्टम ,बाजार मे सारे आम बिक रहा है सिस्टम मगर अफसोस आम आदमी की जेब जो खाली है वरना कमाल का है सिस्टम क्यू की सिस्टम अच्छा होता तो देश मे इतने घोटाले नहीं होते और ना ही आमआदमी दर दर की ठोकरे खाता और ना ही आम आदमी का कफन महँगा होता सायद ये सिस्टम कहे रहा है की संविधान सिर्फ आमआदमी के लिए ही है, देश को लुटनेवालों के लिए नहीं अगर संविधान देश के लुटेरो के लिए भी वही होता तो ये सिस्टम उनको कभी सलाम नहीं करती …..बड़ा कमाल का है सिस्टम |”

*चोरो की समाधि बनती है शहीदो का अपमान होता है

” रेशन कार्ड मे बच्चे का नाम डलवाना है तो आप थक जाओगे मगर किसी घुसपेटिए को रेशन कार्ड चाहिए तो मिल जाता है ………..बड़ा कमाल का है सिस्टम ,आतंकी हमले मे आपके परिवार का कोई मर जाता है तो 5 लाख तक देता है ये सिस्टम मगर वही आतंकी को महेमान बनाकर आपके सर पर रखता है ये सिस्टम ,…..वाह रे सिस्टम आमआदमी को रहने के लिए जगह भी नसीब नहीं होती है मगर देश को लुटनेवालों की शहर के बीचोंबीच समाधि बनाई जाती है ,क्या इसिकों कहते है सिस्टम ? देश के असली शहीद को शहीद का दर्जा भी नहीं देती है सिस्टम मगर देश लुटनेवालों को शहीद घोषित करने पर तुला है सिस्टम |”

* घोटालो की रेल गाड़ी
” शायद तभी ये सिस्टम कहे रहा है आम आदमी से की “ना आघाडी देख ,ना पिछाड़ी देख, तू देख तो सिर्फ हमारे घोटाले की आगगाड़ी देख जिस गाड़ी के हर डिब्बे मे तुझे एक नया घोटाला देखने को मिलेगा और भूलकर भी डिब्बे मत गिनना…..तू थक जाएगा क्यू की ? इस सिस्टम ने हमे ये तो दिया है ” बड़ा कमाल का है ना ये सिस्टम ? आम आदमी को सौचालय नसीब नहीं हो रहा है तो फिर 35 लाख का सौचालय तो दूर की बात है क्यू की सिस्टम यही कहती है की राजा मौज करे, जनता चक्की पिसे और आटा राजा के सैनिक ही खाये ….तू बस्स चक्की पीस क्यू की तू आमआदमी है इस सिस्टम का हिस्सा नहीं अगर हिस्सा होता तो कोयले की खदान मे से एक ब्लॉक तो मिलता ही “सहाय की सहाय” के रूप मे कमाल है जैसे फटे जूते का कोई स्थान नहीं होता है वैसे ही इस देश के सिस्टम मे भी आमआदमी का स्थान कुछ भी नहीं है और यही सत्य है मेरे भाई सायद इसिकों सिस्टम कहते है |”

* न रहेगी तेरी चड्डी और न रहेगा तेरा बनियान

” तू बस्स ! देखता जा क्यू की ना ही तेरे हाथ मे कुछ है और ना ही कुछ रहेगा यकीन मान दोस्त ये सिस्टम ही तुझ से एक दिन तेरी “चड्डी और बनियान” भी छिनेगा …..फिर ये न कहेना की वाह रे सिस्टम क्यू की सिस्टम भी आज कल देश लुटनेवालों के हाथ की कटपुटली जो बन गया है …….बड़ा कमाल का है न ये सिस्टम ? ”

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bharodiya के द्वारा
September 8, 2012

नमस्कार तुलशीभाई क्यां हता ? समळी, खेरो, साप, पडकु,विछी, मच्छर, मांकड शियाळ, कुतरा, दलातरवाडी और नेता । ईन सबका गुण मिला लिजिए । सब को एक जैसे ही पायेंगे । घणुं लख्यु छे तमारे लायक । समय मळे तो जोइ लेजो ।

    eksacchai के द्वारा
    September 8, 2012

    तमारा लायक नो मतलब हु नथी समज्यो भाई जरा खुली ने वात करो ॥कदाच तमने आ लेख नथी गमयों के शु ?

    bharodiya के द्वारा
    September 9, 2012

    તમને વાંચવા લાયક ઘણું લખ્યુ છે મેં. જોઇ લેજો. કોણે કીધુ તમારો લેખ ખરાબ છે ?


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