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" क्या बेवकूफ समजते है जनता को ? "

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” सरकार की नीतियों पर आज कल बहुत सारे सवाल जहाँ खड़े हो रहे है वाही पर दिग्विजय सिंह और कपिल सिम्बल के निवेदन और कूट चाल पर भी विवाद खड़े हो रहे है ,कही कही लगता है की कांग्रेस सरकार देश के अहेम मुद्दे याने “जन लोकपाल” और “काला धन ” के मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है ..क्यों की सरकार ऐसा कोई भी कदम नहीं उठा रही है जिस से “कालाधन” वापस आये उल्टा बाबा रामदेव की संपत्ति और अन्ना हजारे जी पर सरकार छापे मार रही हैऔर सरकार के इस कदम से लोगों का ध्यान बाबा रामदेव की सम्पति और अन्ना हजारे जी की ट्रस्ट पर जाता है और काफी हद तक कांग्रेस लोगों का ध्यान बाबा रामदेव की सम्पति और अन्ना हजारे जी की ट्रस्ट पर लगाने में और देश के अहेम मुद्दे ” जन लोकपाल” और “काले धन ” को भुला ने में कामयाब भी हो रही है | ”

* कालाधन किसे कहेंगे आप ?

” देश की जनता को अँधेरे में रखकर ,देश की जनता के साथ विश्वासघात करके कोई भी सौदे में करोड़ों रुपयों का घोटाला करके जो पैसे मिलते है और पैसों को विदेशों की बैंक में जमा किया गया हो ..उन रुपयों को या फिर उन रुपयों को जो जनता सामने से मंदिर , मस्जिद ,दरगाह , साधु संत को दे रही है ..या फिर उन रुपयों को जो आयुर्वेदिक दवाये बाबा रामदेव के द्वारा बनायीं जाती है उसे जनता द्वारा ख़रीदा जाता है उन रुपयों को ?..अगर बाबा रामदेव के पैसों की और सत्य साईं बाबा के पैसों की जांच सरकार कर सकती है तो ..देश के करोड़ों लोगों को चूसकर हजारो करोड़ों के घोटाले से इक्कट्ठा किये और स्विस बैंक में जमा किये गए पैसों की सरकार क्यों जांच नहीं कर सकती है ..असली देश का काला धन तो स्विस बैंक के लोकरोँ में बंध है ..इस की जांच करो |”

* मंदिरों का पैसा कालाधन है

” कल अगर यही सरकार कहे की शिर्डी के मंदिर का और तिरुपति बालाजी के मंदिर का पैसा कालाधन है तो क्या आप मान लेंगे ? सरकार तो आज कल असली “काले धन के मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाने के लिए यही कर रही है और निशाना बना रही है धार्मिक स्थलों को …..जिसका हाल ही का एक नमूना है सत्य साईं बाबा का … सत्य साईं बाबा जिन्दा थे तो यही नेता वहां जाकर जुकते थे और आज यही नेता उनके कमरे से मिले धन को लेकर जांच करवा रहे है ..खुद के काले धन की जांच को लोगों के दिमाग से निकालने के लिए सरकार गिरती ही जा रही है | ”

* दो सवाल आप सब के लिए

१ ) क्या लोगों के द्वारा किसी मंदिर ,मस्जिद या अन्य धार्मिक स्थल पर दिए गए पैसे को काला धन कहते है ?

२ ) देश की जनता को अँधेरे में रखकर जनता को चूसकर खरबों रुपये स्विस बैंक में पड़े है उसे कहेंगे आप ” काला धन ” ?

फैसला आपके हाथ में है अब |

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bharodiya के द्वारा
June 29, 2011

बेवकुफ तो बेवकोफो को ही कहा जाता है ना ? ईस ब्लोग के बहर भी दुनिया है । जहा करोडो लोग है जो अनपढ है । उसे बडी आसानीसे बेवकुफ बनाया जा सकता है । वो बेवकुफ नही तो क्या है ? करोडो लोग है जो कुछ पढे लिखे तो है लेकिन गरीब है । गरीबी उनकी मजबूरी है । मजबूर आदमी को बहुत सस्ते मे खरीदा जा सकता है । ऐसा आदमी अपने आपको बेच दे , खरीदने वाले की मन्शा क्या है वो समजने की कोशीश ही ना करे तो वो बेवकुफ नही तो क्या है ? कुछ ऐसे लोग भी है जो अपने आप को शाणे समजते है । दूसरे को बेवकुफ बना कर भ्रष्टाचार करते है । भ्रष्टाचार कर के देश की घोर खोदते है । अपने ही देश की जडे काटनेवाला तो सबसे बडा बेफकुफ है । काला धन मै किसीको नही कहुन्गा । धन को काला कहना लक्ष्मी देवी का अपमान है । दुनिया भर की सरकारोने टेक्ष की लालच से लक्ष्मीजी को अकाउन्ट बूक मे कैद कर लिया है । जो कैद मे है उसे गोरा कहा जो कैद मे नही है उसे काला कहा । जब मन्दिर की बात होती हो तो मन्दिर मे रही लक्ष्मी को काला कहना लक्ष्मी का अपमान तो है ही साथ मे मन्दिर और धर्म का भी अपमान है , धर्म से जुडी प्रजा का अपमान है । देश का सन्विधान कहता है सरकार किसी धर्म के मामले मे टान्ग नही लडायेगी । अगर सरकारमे रहे भ्रष्ट तत्व ईर्षा से जलकर या लालचमे आ कर मन्दिर मे रही लक्ष्मी देवी को काला कह कर, वहा से निकलकर , डोलर देवी या फ्रान्क देवी बनाकर विदेश मे रहे अपने अकाउन्ट मे ट्रन्सफर करना चाहे तो सन्विधान का भी अपमान है ।

    eksacchai के द्वारा
    August 10, 2011

    भारोडिया सर … यहाँ लक्ष्मी याने देवी लक्ष्मी जी की बात नहीं हो रही है ..यहाँ बात हो रही है उन काले धन की जो विदेशोया में सड रहा है … मै भी मानता हु की लक्ष्मी जी कभी काली हो ही नहीं सकती मै ही नहीं बल्कि पूरा हिंदुस्तान भी मानेगा ये बात .. मगर अगर सब यही कहेंगे तो फिर विदेशो में पड़े धन को क्या कहेंगे आप ? सफ़ेद … या फिर कला धन …यहाँ बात देश के हित की हो रही है …ये जरूरी है की कला धन देश में वापस आये ..भाई लक्ष्मी जी हम सब के लिए और सबके दिल में विराजमान है ये सत्य है ..और हमारी माता है लक्ष्मी इ …ये भी तो सत्य है आपको ये बात भी बता दू की जब महालक्ष्मी जी को ऑस्ट्रलियन फेशन शो में गलत दिखाया गया था तो सबसे पहले मैंने ही अपने ब्लॉग में और फब पर उस लीसा के खिलाफ लिखा था और आखिर कर लीसा ने माफ़ी मांगी थी …ये सब मैंने क्यों किया पता है … क्यों की मै लक्ष्मी जी का अपमान होते नहीं देख सकता …क्यों की वो माँ है आप दिल पे मत लेना दोस्त …यहाँ काले धन की याने विदेशो में पड़े पैसो की बात हो रही है …माता लक्ष्मी जी की नहीं

    eksacchai के द्वारा
    August 10, 2011

    भरोदिया सर आपकी इस बात से मई बिलकुल सहेमत हु की यहाँ कई लोग याने लाखो लोग अनपढ़ है जिन्हें आसानी से बेवकूफ बनाया जा सकता है …और ये लोग बखूबी बना भी रहे है …सुक्रिया सर …तहे दिल से सुक्रिया

    bharodiya के द्वारा
    August 10, 2011

    भाई अगर टेक्स नही भरा हो तो उसे बिन हिसाबी धन पेहले से ही कहा जाता है, ये मेरे श्ब्द नही है । विदेशो में पडा धन भाई मिक्स धन है । टेक्स की चोरी, सीधी चोरी, आडी चोरी, टेढी चोरी, मतकब सब तराह की चोरी । ये चोरी का माल है, किसीका सफेद धन चोर लेजाये तो काला नही हो जाता । सिर्फ स्थान बदला है । धनको यथा-स्थान करवाना पोलिस का काम है । ये काम हमारे यहा के हवालदार अच्छी तरह से जानते है । दो डंडे पडते ही धन वापस आ जाता है । ईन्कमटेक्सवालो को ईससे दूर ही रेहना चाहिये । ये नही की सरकारी दलाली काटके बाकी का धन चोर के पास रेहने दिया जाये, सफेद बना के । ये पोलीस का केस है, उसे सारा का सारा रिकवर करना है । काला-गोरा का यहा सवाही नही उठता । ये चुराया हुआ धन है, हर हालत मे पोलिस ने उसे वापस लाना है । भ्रष्ट सरकार की तो मन्शा थी की अपने लोगो का धन वापस लाके ईन्कमटेक्स द्वारा सफेद करवा ले । अगर ऐसा होता है तो ए.टी.एम. उखाडने वाले चोर भी बोलेन्गे की साहब ईस मशीन मे से ईतने लाख निकले है अपना टेक्स काटलो बाकी का सफेद धन हमे वापस करदो ।

    eksacchai के द्वारा
    August 10, 2011

    आपके जवाब की प्रतीक्षा है सर … बेहतरीन टिप्पणी के लिए सुक्रिया … खासकर आपके द्वारा दी गयी आज की टिप्पणी मुझे बहुत ही अच्छी और बहुत कुछ सिखा कर गयी है ..मैंने इस पर आपको कमेन्ट भी दी है और आपसे एक बात की अनुमति भी मांगी है … मै इंतज़ार कर रहा हु आपके जवाब का सर

    bharodiya के द्वारा
    August 10, 2011

    एकसच्चाईभाई मै आपकी बात समजा नही । कौन सी बातकी अनुमती और किस बात का ईन्तजार ?

rahulpriyadarshi के द्वारा
June 29, 2011

सबसे पहले आपको इस प्रथम एवं सार्थक लेख के लिए हार्दिक बधाई,आपने जो प्रश्न उठाये हैं उसका जवाब माँगा जाना लाजिमी है,मुझे तो लगता है की जनता ही मूर्ख है जो इतना हल्ला होने के बाद भी अपने अधिकारों के लिए उठ खड़े होने का साहस नहीं दिखा पाती,यह लोकतंत्र का बलात्कार है.

    eksacchai के द्वारा
    August 10, 2011

    सत प्रतिशत आप से सहेमत हु मै राहुल सर ..करारी टिपण्णी दी है आपने ..जो सत्य दर्शा रही है ..आपका तहे दिल से सुक्रिया दोस्त

eksacchai के द्वारा
August 10, 2011

कोई बात नहीं मगर ..सच कहू तो आपसे चर्चा कर के मजा आया ..साफ़ साफ़ बोलने वाले मुझे बहुत ही अच्छे लगते है ..क्यों की उनसे ही कुछ सिखने को मिलता है ..सुक्रिया दोस्त ..ऐसे ही स्नेह बनाये रखना और ये जो आपकी आज की टिप्पन्नी है उस पर जल्द ही एक पोस्ट लेकर भी आऊंगा अगर आपको ऐतराज न हो तो ..क्यों की आप के इन सब्दों ने मेरा दिल जीत लिया है ..जो सच्चाई से भरे है ..ये रहे आपके सब्द : अगर टेक्स नही भरा हो तो उसे बिन हिसाबी धन पेहले से ही कहा जाता है, ये मेरे श्ब्द नही है । विदेशो में पडा धन भाई मिक्स धन है । टेक्स की चोरी, सीधी चोरी, आडी चोरी, टेढी चोरी, मतकब सब तराह की चोरी । ये चोरी का माल है, किसीका सफेद धन चोर लेजाये तो काला नही हो जाता । बहुत ही गहेरी भरी बात कही है आपने .. आपको ऐतराज न हो तो मै इस पर लिखू


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